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ramayan 6.43.20: प्रज्ञा ने तीन बाणों से सम्पाती को घायल कर दिया। तत्पश्चात् सम्पाती ने भी युद्ध के प्रारम्भ में अश्वकर्ण नामक वृक्ष से प्रजंग को मार डाला। 20॥   |   ramayan सर्ग 6.43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.43.20 
सम्पातिस्तु प्रजङ्घेन त्रिभिर्बाणै: समाहत:।
निजघानाश्वकर्णेन प्रजङ्घं रणमूर्धनि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
प्रज्ञा ने तीन बाणों से सम्पाती को घायल कर दिया। तत्पश्चात् सम्पाती ने भी युद्ध के प्रारम्भ में अश्वकर्ण नामक वृक्ष से प्रजंग को मार डाला। 20॥
 
Prajna wounded Sampati with three arrows. Then Sampati also killed Prajhanga at the beginning of the battle with a tree named Ashvakarna. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)