श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  6.41.84 
रावणस्य वच: श्रुत्वा दीप्ताग्निमिव तेजसा।
जगृहुस्तं ततो घोराश्चत्वारो रजनीचरा:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
रावण के ये शब्द सुनकर चार भयंकर राक्षसों ने प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी अंगद को पकड़ लिया।
 
On hearing these words of Ravana, four fierce demons caught hold of Angada who was as bright as a blazing fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)