श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  6.41.82 
इत्येवं परुषं वाक्यं ब्रुवाणे हरिपुङ्गवे।
अमर्षवशमापन्नो निशाचरगणेश्वर:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जब वानरों के प्रधान अंगद ने ऐसी कठोर बातें कहीं, तो रात्रिचर प्राणियों का राजा रावण अत्यन्त क्रोधित हो गया।
 
When Angada, the chief of the monkeys, spoke such harsh words, Ravana, the king of the nocturnal creatures, became extremely angry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)