श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.41.30 
तौ त्वदीर्घेण कालेन भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
रावणस्य पुरीं लङ्कामासेदतुररिंदमौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण, शत्रुओं का दमन करते हुए, कुछ ही समय में लंकापुरी में पहुँच गये।
 
Those two brothers, Shri Ram and Lakshman, who were suppressing the enemies, reached Lankapuri within a short time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)