श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.41.28 
तत: पश्चात् सुमहती पृतनर्क्षवनौकसाम्।
प्रच्छाद्य महतीं भूमिमनुयाति स्म राघवम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रीछ और वानरों की वह विशाल सेना बहुत बड़ा क्षेत्र घेरकर श्री रघुनाथजी के पीछे-पीछे चली॥28॥
 
After that, that huge army of bears and monkeys covered a large area and followed Shri Raghunathji. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)