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ramayan 6.40.30: वहाँ ऐसे अद्भुत कर्म करके वायु के समान वेगवान सूर्यपुत्र सुग्रीव बड़े हर्ष के साथ वानर सेना में प्रवेश कर दशरथ के राजकुमार श्रीराम का युद्ध के प्रति उत्साह बढ़ा रहे थे। उस समय प्रमुख वानरों ने वानरराज का अभिवादन किया।   |   ramayan सर्ग 6.40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.40.30 
इति स सवितृसूनुस्तत्र तत् कर्म कृत्वा
पवनगतिरनीकं प्राविशत् सम्प्रहृष्ट:।
रघुवरनृपसूनोर्वर्धयन् युद्धहर्षं
तरुमृगगणमुख्यै: पूज्यमानो हरीन्द्र:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ ऐसे अद्भुत कर्म करके वायु के समान वेगवान सूर्यपुत्र सुग्रीव बड़े हर्ष के साथ वानर सेना में प्रवेश कर दशरथ के राजकुमार श्रीराम का युद्ध के प्रति उत्साह बढ़ा रहे थे। उस समय प्रमुख वानरों ने वानरराज का अभिवादन किया।
 
Having performed such wonderful deeds there, Sugreeva, the son of the Sun, who was as swift as the wind, entered the monkey army with great joy, increasing the enthusiasm of Dasaratha's prince Shri Ram for the war. At that time, the chief monkeys greeted the monkey king.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें चालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)