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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  6.40.3-4 
तस्य गोपुरशृङ्गस्थं राक्षसेन्द्रं दुरासदम्॥ ३॥
श्वेतचामरपर्यन्तं विजयच्छत्रशोभितम्।
रक्तचन्दनसंलिप्तं रत्नाभरणभूषितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस नगर के गोपुर की छत पर उन्होंने अजेय राक्षसराज रावण को विराजमान देखा, उसके दोनों ओर श्वेत पंखे लहरा रहे थे और उसके सिर पर विजय छत्र सुशोभित था। रावण का सम्पूर्ण शरीर लाल चंदन से रंगा हुआ था। उसके अंग लाल आभूषणों से सुशोभित थे।
 
On the roof of the gopura of that city, he saw the invincible demon king Ravana sitting, white fans were being waved on both sides of him, and a victory umbrella adorned his head. Ravana's entire body was painted with red sandalwood. His limbs were adorned with red ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)