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ramayan 6.40.24-26: कभी वे तिरछे चलते, कभी टेढ़े-मेढ़े ढंग से दाएँ-बाएँ घूमते, कभी अपनी जगह से हिलकर शत्रु के आक्रमण को निष्फल कर देते, कभी स्वयं ही शत्रु के आक्रमण से बचने के लिए युक्ति-युक्तियाँ अपनाते, कभी एक स्थिर खड़ा रहता और दूसरा उसके चारों ओर दौड़ता, कभी दोनों शीघ्रता से एक-दूसरे की ओर दौड़कर आक्रमण करते, कभी वे मेढकों की भाँति झुककर या धीरे-धीरे उछलते हुए चलते, कभी लड़ते हुए एक ही स्थान पर स्थिर रहते, कभी पीछे हटते, कभी सामने खड़े होकर पीछे हटते, कभी अपने प्रतिद्वन्द्वी को पकड़ने की इच्छा से शरीर सिकोड़कर या झुकाकर उसकी ओर दौड़ते, कभी अपने पैरों से उस पर आक्रमण करने के लिए अपना मुख नीचे करके अपने प्रतिद्वन्द्वी पर आक्रमण करते, कभी प्रतिद्वन्द्वी की भुजा पकड़ने के लिए अपनी भुजाएँ फैलाते और कभी प्रतिद्वन्द्वी की पकड़ से छूटने के लिए अपनी भुजाएँ पीछे खींच लेते। इस प्रकार मल्लयुद्ध में अत्यन्त निपुण वानरराज सुग्रीव और रावण एक-दूसरे पर आक्रमण करने के लिए वृत्ताकार गति कर रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध  »  श्लोक 24-26
 
 
श्लोक  6.40.24-26 
तिरश्चीनगतान्येव तथा वक्रगतानि च।
परिमोक्षं प्रहाराणां वर्जनं परिधावनम्॥ २४॥
अभिद्रवणमाप्लावमवस्थानं सविग्रहम्।
परावृत्तमपावृत्तमपद्रुतमवप्लुतम्॥ २५॥
उपन्यस्तमपन्यस्तं युद्धमार्गविशारदौ।
तौ विचेरतुरन्योन्यं वानरेन्द्रश्च रावण:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कभी वे तिरछे चलते, कभी टेढ़े-मेढ़े ढंग से दाएँ-बाएँ घूमते, कभी अपनी जगह से हिलकर शत्रु के आक्रमण को निष्फल कर देते, कभी स्वयं ही शत्रु के आक्रमण से बचने के लिए युक्ति-युक्तियाँ अपनाते, कभी एक स्थिर खड़ा रहता और दूसरा उसके चारों ओर दौड़ता, कभी दोनों शीघ्रता से एक-दूसरे की ओर दौड़कर आक्रमण करते, कभी वे मेढकों की भाँति झुककर या धीरे-धीरे उछलते हुए चलते, कभी लड़ते हुए एक ही स्थान पर स्थिर रहते, कभी पीछे हटते, कभी सामने खड़े होकर पीछे हटते, कभी अपने प्रतिद्वन्द्वी को पकड़ने की इच्छा से शरीर सिकोड़कर या झुकाकर उसकी ओर दौड़ते, कभी अपने पैरों से उस पर आक्रमण करने के लिए अपना मुख नीचे करके अपने प्रतिद्वन्द्वी पर आक्रमण करते, कभी प्रतिद्वन्द्वी की भुजा पकड़ने के लिए अपनी भुजाएँ फैलाते और कभी प्रतिद्वन्द्वी की पकड़ से छूटने के लिए अपनी भुजाएँ पीछे खींच लेते। इस प्रकार मल्लयुद्ध में अत्यन्त निपुण वानरराज सुग्रीव और रावण एक-दूसरे पर आक्रमण करने के लिए वृत्ताकार गति कर रहे थे।
 
Sometimes they would walk sideways, sometimes they would turn left and right in a zigzag manner, sometimes they would move from their place and make the enemy's attack ineffective, sometimes they would themselves use tricks and tactics to save themselves from the enemy's attack, sometimes one would stand still and the other would run around him, sometimes both would run towards each other quickly and attack, sometimes they would walk bending or hopping slowly like frogs, sometimes they would remain stationary at one place while fighting, sometimes they would move backwards, sometimes they would move backwards while standing in front, sometimes they would run towards their opponent by shrinking or bending their body with the desire to catch him, sometimes they would attack their opponent with their face down to attack him with their feet, sometimes they would stretch their arms to catch the opponent's arm and sometimes they would pull their arms back to escape from the opponent's grip. In this way, the monkey king Sugreeva and Ravana, who were highly proficient in the art of wrestling, were moving in a circle to attack each other. 24–26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)