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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  6.40.2-3h 
स्थित्वा मुहूर्तं तत्रैव दिशो दश विलोकयन्।
त्रिकूटशिखरे रम्ये निर्मितां विश्वकर्मणा॥ २॥
ददर्श लङ्कां सुन्यस्तां रम्यकाननशोभिताम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ कुछ देर रुकने और दसों दिशाओं में देखने के बाद श्री राम ने विश्वकर्मा द्वारा निर्मित, त्रिकूट पर्वत के सुन्दर शिखर पर स्थित तथा सुन्दर वनों से सुशोभित लंकापुरी देखी।
 
After staying there for a while and looking in all the ten directions, Shri Ram saw Lankapuri, built by Vishwakarma, situated beautifully on the beautiful peak of the Trikuta mountain and adorned with beautiful forests.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)