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ramayan 6.40.10: राक्षस! मैं भगवान लोकनाथ श्री राम का मित्र और सेवक हूँ। महाराज श्री राम के तेज के कारण आज तू मेरे हाथों से बच नहीं सकेगा।॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 40: सुग्रीव और रावण का मल्लयुद्ध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.40.10 
लोकनाथस्य रामस्य सखा दासोऽस्मि राक्षस।
न मया मोक्ष्यसेऽद्य त्वं पार्थिवेन्द्रस्य तेजसा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राक्षस! मैं भगवान लोकनाथ श्री राम का मित्र और सेवक हूँ। महाराज श्री राम के तेज के कारण आज तू मेरे हाथों से बच नहीं सकेगा।॥10॥
 
Demon! I am the friend and servant of Lord Loknath Shri Ram. Due to the brilliance of Maharaj Shri Ram, you will not be able to escape from my hands today.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)