श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  6.4.98 
अत: परमतीरोऽयं सागर: सरितां पति:।
न चायमनुपायेन शक्यस्तरितुमर्णव:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
इसके आगे नदियों का स्वामी समुद्र है, जिसका कहीं भी अन्त नहीं दिखाई देता। अब बिना किसी उपयुक्त साधन के समुद्र को पार करना असम्भव है॥98॥
 
‘Beyond this lies the ocean, the lord of rivers, whose end cannot be seen anywhere. Now it is impossible to cross the ocean without any suitable means.॥ 98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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