श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.4.92 
महेन्द्रमथ सम्प्राप्य रामो राजीवलोचन:।
आरुरोह महाबाहु: शिखरं द्रुमभूषितम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
महेन्द्र पर्वत पर पहुँचकर कमल-नेत्र शक्तिशाली श्री राम उसके शिखर पर चढ़ गए, जो नाना प्रकार के वृक्षों से सुशोभित था।
 
On reaching the Mahendra mountain, the lotus-eyed, powerful Sri Rama climbed its peak which was adorned with various kinds of trees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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