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श्लोक 6.4.86  |
तस्य सानुषु कूजन्ति नानाद्विजगणास्तथा।
स्नात्वा पीत्वोदकान्यत्र जले क्रीडन्ति वानरा:॥ ८६॥ |
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| अनुवाद |
| उस पर्वत की चोटियों पर नाना प्रकार के पक्षी चहचहाते थे। बन्दर उन जलाशयों में स्नान करते, जल पीते और जल में क्रीड़ा करते थे। |
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| Various kinds of birds used to chirp on the peaks of that mountain. The monkeys used to bathe in those reservoirs, drink water and play in the water. 86. |
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