| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव » श्लोक 59-61h |
|
| | | | श्लोक 6.4.59-61h  | सरांसि विमलाम्भांसि द्रुमाकीर्णांश्च पर्वतान्॥ ५९॥
समान् भूमिप्रदेशांश्च वनानि फलवन्ति च।
मध्येन च समन्ताच्च तिर्यक् चाधश्च साविशत्॥ ६०॥
समावृत्य महीं कृत्स्नां जगाम महती चमू:। | | | | | | अनुवाद | | वह विशाल सेना स्वच्छ जल वाले सरोवरों, वृक्षों से आच्छादित पर्वतों, मैदानी भूमि और फलों से भरे वनों वाले इन सब स्थानों के बीच में, यहाँ-वहाँ, ऊपर-नीचे, सब ओर से सम्पूर्ण भूमि को घेरे हुए इधर-उधर घूम रही थी। ॥59-60 1/2॥ | | | | That huge army was moving around, in the middle of all these places - lakes with clear water, mountains covered with trees, plains of land and forests full of fruits - encircling the entire land on all sides, here and there, up and down. ॥ 59-60 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|