श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.4.52 
सर्वं चैतद् विनाशाय राक्षसानामुपस्थितम्।
काले कालगृहीतानां नक्षत्रं ग्रहपीडितम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
'यह सब राक्षसों के विनाश के लिए हुआ है; क्योंकि जो लोग काल के पाश में बंधे हैं, उनके नक्षत्र काल के अनुसार ग्रहों से पीड़ित होते हैं।
 
‘All this has happened for the destruction of the demons; because those who are bound in the noose of time, their nakshatra is afflicted by the planets according to the time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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