श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.4.5 
उत्तराफाल्गुनी ह्यद्य श्वस्तु हस्तेन योक्ष्यते।
अभिप्रयाम सुग्रीव सर्वानीकसमावृता:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है। कल चंद्रमा हस्त नक्षत्र से युक्त होगा। अतः सुग्रीव! हम आज ही समस्त सेनाओं के साथ प्रस्थान करें।
 
‘Today is the constellation named Uttaraphalguni. Tomorrow the moon will be in conjunction with the constellation Hasta. Therefore, Sugreeva! Let us travel with all the armies today itself.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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