श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.4.28 
अन्योन्यं सहसा दृप्ता निर्वहन्ति क्षिपन्ति च।
पतन्तश्चोत्पतन्त्यन्ये पातयन्त्यपरे परान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कुछ मतवाले बन्दर एक-दूसरे को उठाकर मस्ती कर रहे थे। कुछ अपने ऊपर बैठे बन्दरों को झटक रहे थे। कुछ चलते हुए उछल रहे थे और कुछ बन्दर ऊपर से धक्का देकर नीचे गिरा रहे थे।॥28॥
 
Some drunken monkeys were carrying each other for fun. Some would shake off the monkeys that were sitting on them. Some would jump up while walking and other monkeys would push others from above and make them fall down.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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