श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.4.18 
यास्यामि बलमध्येऽहं बलौघमभिहर्षयन्।
अधिरुह्य हनूमन्तमैरावतमिवेश्वर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे भगवान इन्द्र ऐरावत हाथी पर सवार होते हैं, वैसे ही मैं हनुमान के कंधों पर सवार होकर सेना के बीच में रहकर सारी सेना का आनन्द बढ़ाऊँगा॥ 18॥
 
Just as Lord Indra rides on the Airavat elephant, similarly I will ride on Hanuman's shoulders and stay in the midst of the army, increasing the joy of the entire army.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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