श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.4.15 
गजश्च गिरिसंकाशो गवयश्च महाबल:।
गवाक्षश्चाग्रतो यातु गवां दृप्त इवर्षभ:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पर्वत के समान विशाल हाथी, बलवान गौ और मतवाले बैल के समान वीर गवाक्ष सेना के आगे चलें॥15॥
 
‘The huge elephant like a mountain, the mighty cow and the valiant Gavaksha like a drunken bull should march ahead of the army.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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