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श्लोक 6.4.121  |
ततो विस्मयमापन्ना हरयो ददृशु: स्थिता:।
भ्रान्तोर्मिजालसंनादं प्रलोलमिव सागरम्॥ १२१॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् वहाँ खड़े हुए वानरों ने भी देखा कि समुद्र में लहरों की ध्वनि से अत्यन्त व्याकुलता छा गई है। यह देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ॥121॥ |
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| Thereafter, the monkeys standing there also saw that the ocean had become very restless with the sound of the swirling waves. They were very surprised to see this.॥ 121॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुर्थ: सर्ग: ॥ ४ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें चौथा सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ॥ |
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