श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  6.4.107 
सा वानराणां ध्वजिनी सुग्रीवेणाभिपालिता।
त्रिधा निविष्टा महती रामस्यार्थपराभवत्॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव द्वारा रक्षित श्री रामचन्द्रजी की सेवा में तत्पर वानरों की वह विशाल सेना रीछ, लंगूर और वानरों के वियोग में तीन भागों में विभक्त हो गई।
 
Protected by Sugriva, that huge army of monkeys, ready to serve Shri Ramchandraji, got divided into three parts due to the separation of bears, langurs and monkeys.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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