श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  6.4.105 
वेलावनमुपागम्य ततस्ते हरिपुङ्गवा:।
निविष्टाश्च परं पारं काङ्क्षमाणा महोदधे:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
समुद्र के किनारे के वन में पहुँचकर वे सभी महापुरुष वानर समुद्र के उस पार जाने की इच्छा मन में लिए वहीं रहने लगे ॥105॥
 
Having reached the forest near the sea-shore, all those great monkeys stayed there with the desire in their hearts to go to the other side of the sea. ॥105॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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