श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  6.4.102 
स्वां स्वां सेनां समुत्सृज्य मा च कश्चित् कुतो व्रजेत्।
गच्छन्तु वानरा: शूरा ज्ञेयं छन्नं भयं च न:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
इस समय कोई भी सेनापति किसी भी कारण से अपनी सेना छोड़कर अन्यत्र न जाए । सभी वीर योद्धा अपने-अपने स्थान पर जाकर वानर सेना की रक्षा करें । सभी को यह ज्ञात हो जाना चाहिए कि राक्षसों की माया से हम गुप्त रूप से भयभीत हो सकते हैं ॥102॥
 
‘At this time, no commander should leave his army for any reason and go anywhere else. All the brave warriors should go to their respective places to protect the monkey army. Everyone should know that we can be secretly frightened by the illusion of demons.'॥ 102॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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