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ramayan 6.39.8: वहाँ का सुन्दर वन चैत्ररथ और नंदनवन के समान माया से परिपूर्ण रहता था और सब ऋतुओं में मनोहर शोभा पाता था॥8॥   |   ramayan सर्ग 6.39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.39.8 
तच्चैत्ररथसंकाशं मनोज्ञं नन्दनोपमम्।
वनं सर्वर्तुकं रम्यं शुशुभे षट्पदायुतम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ का सुन्दर वन चैत्ररथ और नंदनवन के समान माया से परिपूर्ण रहता था और सब ऋतुओं में मनोहर शोभा पाता था॥8॥
 
Like Chaitrarath and Nandanvan, the beautiful forest there used to be filled with illusions and had a beautiful beauty in all seasons. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)