Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.39.25: वहाँ नाना प्रकार के पक्षी मधुर वाणी बोलते थे। वहाँ हिरण आदि नाना प्रकार के पशु आया करते थे। वह नाना प्रकार के पुष्पों से समृद्ध था और वहाँ नाना प्रकार के आकार-प्रकार के राक्षस निवास करते थे॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.39.25 
नानाविहगसंघुष्टां नानामृगनिषेविताम्।
नानाकुसुमसम्पन्नां नानाराक्षससेविताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ नाना प्रकार के पक्षी मधुर वाणी बोलते थे। वहाँ हिरण आदि नाना प्रकार के पशु आया करते थे। वह नाना प्रकार के पुष्पों से समृद्ध था और वहाँ नाना प्रकार के आकार-प्रकार के राक्षस निवास करते थे॥ 25॥
 
Various birds were speaking there in their sweet voices. Various kinds of animals like deer etc. used to visit it. It was rich with the wealth of various kinds of flowers and demons of various shapes used to live there.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)