श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.39.24 
मनोज्ञां काञ्चनवतीं पर्वतैरुपशोभिताम्।
नानाधातुविचित्रैश्च उद्यानैरुपशोभिताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह नगर बहुत सुन्दर था, सोने से भरा हुआ, असंख्य पर्वतों से सुशोभित, नाना प्रकार की विचित्र धातुओं से रंगा हुआ तथा अनेक उद्यानों से सुशोभित था।
 
Thus the city was very beautiful, full of gold, adorned with numerous mountains, painted with various kinds of strange metals and decorated with many gardens.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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