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श्लोक  6.39.20 
दशयोजनविस्तीर्णा विंशद्योजनमायता।
सा पुरी गोपुरैरुच्चै: पाण्डुराम्बुदसंनिभै:।
काञ्चनेन च शालेन राजतेन च शोभते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नगर दस योजन चौड़ा और बीस योजन लंबा था। श्वेत मेघों के समान ऊँचे गोपुरम और सोने-चाँदी की प्राचीरें इसकी शोभा बढ़ा रही थीं।
 
The city was ten yojanas wide and twenty yojanas long. High gopurams like white clouds and ramparts of gold and silver enhanced its beauty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)