श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.39.19 
मनसापि दुरारोहं किं पुन: कर्मणा जनै:।
निविष्टा तस्य शिखरे लङ्का रावणपालिता॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लोग मन से त्रिकूट के शिखर पर चढ़ने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। फिर कर्म से उस पर चढ़ने का क्या प्रयोजन है? रावण द्वारा पालित लंका उसी त्रिकूट के शिखर पर बसी थी॥19॥
 
People could not even imagine climbing the peak of Trikuta with their mind. Then what is the point of climbing it with action? Lanka, nurtured by Ravana, was settled on the same peak of Trikuta.॥19॥
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