श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.39.15 
कुर्वन्तस्ते महावेगा महीं चरणपीडिताम्।
रजश्च सहसैवोर्ध्वं जगाम चरणोत्थितम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब वे महान् और वेगशाली वानरों ने अपने पैरों से पृथ्वी को दबाया, तब उनके पैरों से उठी धूल सहसा ऊपर की ओर उड़ गई ॥15॥
 
When those great and swift monkeys pressed the earth with their feet, the dust raised by their feet would suddenly fly upwards. ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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