श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  6.39.10-11 
नित्यमत्तविहंगानि भ्रमराचरितानि च।
कोकिलाकुलखण्डानि विहंगाभिरुतानि च॥ १०॥
भृङ्गराजाधिगीतानि कुररस्वनितानि च।
कोणालकविघुष्टानि सारसाभिरुतानि च।
विविशुस्ते ततस्तानि वनान्युपवनानि च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
लंका के वन और उद्यान सदैव मदमस्त पक्षियों से सुशोभित रहते थे। भौंरे सदैव वृक्षों की शाखाओं पर मंडराते रहते थे। वन के प्रत्येक भाग में कोयल बोलती रहती थी। पक्षी सदैव चहचहाते रहते थे। मधुमक्खियों के राजा के गीत गूंजते रहते थे। कौओं की आवाजें गूंजती रहती थीं। शंखों की ध्वनि सदैव गूंजती रहती थी और सारसों की मधुर ध्वनि सर्वत्र फैलती रहती थी। कुछ वीर वानर उन वनों और उद्यानों में प्रविष्ट हुए।
 
The forests and gardens of Lanka were always adorned with intoxicated birds. Bumblebees were always hovering on the branches of the trees. In every part of the forest, cuckoos were calling. Birds were always chirping. The songs of the king of the bees were uttered. The sounds of the crows were echoing. The chirping of the conch shells was always there and the melody of the cranes was spread everywhere. Some brave monkeys entered those forests and gardens.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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