श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.37.8 
भूत्वा शकुनय: सर्वे प्रविष्टाश्च रिपोर्बलम्।
विधानं विहितं यच्च तद् दृष्ट्वा समुपस्थिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ये सब लोग पक्षी का रूप धारण करके शत्रु की सेना में गए थे और वहाँ की व्यवस्था को अपनी आँखों से देखकर पुनः यहाँ आ गए हैं ॥8॥
 
All these people had taken the form of birds and had gone to the enemy's army, and after seeing with their own eyes the arrangements made there, they have again come here. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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