श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.37.7 
अनल: पनसश्चैव सम्पाति: प्रमतिस्तथा।
गत्वा लङ्कां ममामात्या: पुरीं पुनरिहागता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘मेरे मंत्री अनल, पनस, सम्पाती और प्रमति - ये चारों लंकापुरी में जाकर पुनः यहाँ आ गए हैं।॥ 7॥
 
‘My ministers Anala, Panasa, Sampati and Pramati - all four of them have visited Lankapuri and have returned here again.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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