श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.37.28 
हनूमान् पश्चिमद्वारं निष्पीडॺ पवनात्मज:।
प्रविशत्वप्रमेयात्मा बहुभि: कपिभिर्वृत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पवनपुत्र हनुमान्‌जी अपार मनःशक्ति से युक्त हैं। वे बहुत से वानरों के साथ लंका के पश्चिमी द्वार में प्रविष्ट हुए॥ 28॥
 
Hanumaan, the son of the wind, is endowed with immeasurable strength of mind. He entered the western gate of Lanka along with many monkeys.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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