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ramayan 6.37.21-22: 'श्रीराम! जब रावण कुबेर से युद्ध कर रहा था, तब उसके साथ साठ लाख राक्षस थे। वे सभी बल, पराक्रम, तेज, धैर्य और अहंकार में दुष्ट रावण के समान थे।' (21-22)   |   ramayan सर्ग 6.37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.37.21-22 
कुबेरं तु यदा राम रावण: प्रतियुद्धॺति॥ २१॥
षष्टि: शतसहस्राणि तदा निर्यान्ति राक्षसा:।
पराक्रमेण वीर्येण तेजसा सत्त्वगौरवात्।
सदृशा ह्यत्र दर्पेण रावणस्य दुरात्मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! जब रावण कुबेर से युद्ध कर रहा था, तब उसके साथ साठ लाख राक्षस थे। वे सभी बल, पराक्रम, तेज, धैर्य और अहंकार में दुष्ट रावण के समान थे।' (21-22)
 
‘Shri Ram! When Ravana fought with Kubera, 60 lakh demons accompanied him. All of them were similar to the evil-spirited Ravana in terms of strength, valour, brilliance, patience and arrogance. 21-22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)