| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति » श्लोक 1-3 |
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| | | | श्लोक 6.37.1-3  | नरवानरराजानौ स तु वायुसुत: कपि:।
जाम्बवानृक्षराजश्च राक्षसश्च विभीषण:॥ १॥
अङ्गदो वालिपुत्रश्च सौमित्रि: शरभ: कपि:।
सुषेण: सहदायादो मैन्दो द्विविद एव च॥ २॥
गजो गवाक्ष: कुमुदो नलोऽथ पनसस्तथा।
अमित्रविषयं प्राप्ता: समवेता: समर्थयन्॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | नरराज श्रीराम, सुमित्राकुमार लक्ष्मण, वानरराज सुग्रीव, वायुपुत्र हनुमान, ऋक्षराज जाम्बवान, राक्षस विभीषण, वालिपुत्र अंगद, शरभ तथा उनके सम्बन्धी सुषेण, मैन्द, द्विविद, गज, गवाक्ष, कुमुद, नल तथा पनस, जो शत्रु देश में पहुँच गये थे, वे सब मिलकर विचार करने लगे- 1-3॥ | | | | Narraj Shri Ram, Sumitrakumar Lakshman, Monkey King Sugriva, Vayuputra Hanuman, Riksharaj Jambavan, Rakshasa Vibhishana, Valiputra Angad, Sharabha, along with their relatives Sushen, Mainda, Dwivid, Gaj, Gavaksh, Kumud, Nal and Panas, who had reached the enemy's country, all of them started thinking together - 1-3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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