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ramayan 6.36.8: कमल के समान सुन्दर सीता को वन से वापस ले आने के बाद अब मैं राम के भय से उसे कैसे वापस भेज सकता हूँ?॥8॥   |   ramayan सर्ग 6.36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.36.8 
आनीय च वनात् सीतां पद्महीनामिव श्रियम्।
किमर्थं प्रतिदास्यामि राघवस्य भयादहम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कमल के समान सुन्दर सीता को वन से वापस ले आने के बाद अब मैं राम के भय से उसे कैसे वापस भेज सकता हूँ?॥8॥
 
Having brought back Sita, who is as beautiful as a lotus-less lotus, from the forest, how can I now, out of fear of Rama, send her back?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)