श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.36.7 
प्रभवन्तं पदस्थं हि परुषं कोऽभिभाषते।
पण्डित: शास्त्रतत्त्वज्ञो विना प्रोत्साहनेन वा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कौन ऐसा शास्त्रज्ञ है जो शत्रु से प्रोत्साहन प्राप्त किये बिना, अपने राज्य में प्रतिष्ठित तथा प्रभावशाली व्यक्ति से कठोर वचन बोल सकता है?
 
Which scholar of scriptures can speak harsh words to a man who is influential and also has prestige in his kingdom, without getting encouragement from the enemy?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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