श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.36.19 
उत्तरस्यां पुरद्वारि व्यादिश्य शुकसारणौ।
स्वयं चात्र गमिष्यामि मन्त्रिणस्तानुवाच ह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शुक और सारण को रक्षा के लिए नगर के उत्तरी द्वार पर जाने का आदेश देकर रावण ने अपने मंत्रियों से कहा, 'मैं स्वयं भी उत्तरी द्वार पर जाऊँगा।'॥19॥
 
Thereafter ordering Shuka and Saran to go to the northern gate of the city for protection, Ravana said to his ministers, 'I myself will also go to the northern gate.'॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas