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ramayan 6.36.14: रावण को ऐसी बातें कहते देख और क्रोध एवं अप्रसन्नता से भरकर माल्यवान बहुत लज्जित हुआ और उसने कोई उत्तर नहीं दिया ॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.36.14 
एवं ब्रुवाणं संरब्धं रुष्टं विज्ञाय रावणम्।
व्रीडितो माल्यवान् वाक्यं नोत्तरं प्रत्यपद्यत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रावण को ऐसी बातें कहते देख और क्रोध एवं अप्रसन्नता से भरकर माल्यवान बहुत लज्जित हुआ और उसने कोई उत्तर नहीं दिया ॥14॥
 
Seeing Ravana saying such things and being filled with anger and displeasure, Malyavan felt very ashamed and did not give any reply. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)