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श्लोक 6.36.12  |
यदि तावत् समुद्रे तु सेतुर्बद्धो यदृच्छया।
रामेण विस्मय: कोऽत्र येन ते भयमागतम्॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| यदि संयोगवश राम ने समुद्र पर सेतु बना दिया, तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है, जिससे तुम इतने भयभीत हो?॥12॥ |
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| If by chance Rama built a bridge over the sea, what is so surprising about it that you are so afraid?॥ 12॥ |
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