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द्विधा भज्येयमप्येवं न नमेयं तु कस्यचित्।
एष मे सहजो दोष: स्वभावो दुरतिक्रम:॥ ११॥
अनुवाद
"मैं बीच में मुखर हो जाऊँगा, परन्तु किसी के सामने झुक न सकूँगा। यह मेरा स्वाभाविक दोष है और मेरे स्वभाव का विरोध करना किसी के लिए भी कठिन है ॥11॥
"I will be outspoken in the middle, but I will not be able to bow down before anyone. This is my natural flaw and my nature is difficult for anyone to resist. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥