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ramayan 6.36.10: जिसके सामने देवता भी द्वंद्वयुद्ध में टिक नहीं सकते, वह रावण युद्ध में किससे डरेगा?॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.36.10 
द्वन्द्वे यस्य न तिष्ठन्ति दैवतान्यपि संयुगे।
स कस्माद् रावणो युद्धे भयमाहारयिष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जिसके सामने देवता भी द्वंद्वयुद्ध में टिक नहीं सकते, वह रावण युद्ध में किससे डरेगा?॥10॥
 
In front of whom even gods cannot stand in a duel, whom will that Ravana be afraid of in the war? ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)