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श्लोक 6.36.10  |
द्वन्द्वे यस्य न तिष्ठन्ति दैवतान्यपि संयुगे।
स कस्माद् रावणो युद्धे भयमाहारयिष्यति॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| जिसके सामने देवता भी द्वंद्वयुद्ध में टिक नहीं सकते, वह रावण युद्ध में किससे डरेगा?॥10॥ |
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| In front of whom even gods cannot stand in a duel, whom will that Ravana be afraid of in the war? ॥10॥ |
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