श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.35.9 
हीयमानेन कर्तव्यो राज्ञा संधि: समेन च।
न शत्रुमवमन्येत ज्यायान् कुर्वीत विग्रहम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा की शक्ति क्षीण हो रही हो अथवा जो शत्रु के समान बल रखता हो, उसे शत्रु के साथ संधि कर लेनी चाहिए। अपने से अधिक बलवान अथवा समान बल वाले शत्रु का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। यदि वह स्वयं बल में श्रेष्ठ हो, तभी शत्रु के विरुद्ध युद्ध करना चाहिए।॥9॥
 
‘A king whose power is waning or who has the same power as the enemy should enter into a treaty with him. One should never insult an enemy who is more powerful than him or has the same power. Only if he himself is superior in power should he wage war against the enemy.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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