श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.35.33-34h 
पक्षिणश्च मृगा: सर्वे प्रत्यादित्यं रुदन्ति ते।
करालो विकटो मुण्ड: पुरुष: कृष्णपिङ्गल:॥ ३३॥
कालो गृहाणि सर्वेषां काले कालेऽन्ववेक्षते।
 
 
अनुवाद
'पक्षी और मृग सभी सूर्य की ओर मुख करके रोते हैं। काल एक भयंकर, भयंकर, काले और भूरे, मुंडे हुए सिर वाले मनुष्य का रूप धारण करके समय-समय पर हमारे घरों की ओर देखता है। 33 1/2।
 
‘The birds and deer all cry facing the Sun. Taking the form of a fierce, terrible, black and brown man with shaven heads, Kaal looks at our homes from time to time. 33 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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