श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.35.32 
चीचीकूचीति वाशन्त्य: शारिका वेश्मसु स्थिता:।
पतन्ति ग्रथिताश्चापि निर्जिता: कलहैषिभि:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पक्षियों के बच्चे कलरव करते हुए अन्य पक्षियों में उलझ जाते हैं और उनसे पराजित होकर भूमि पर गिर पड़ते हैं॥ 32॥
 
‘The nestlings of the birds get entangled with the other birds chirping and being defeated by them, fall to the ground.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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