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ramayan 6.35.3-4h: जगत् को पीड़ा देने वाले महाबली और क्रूर राक्षसराज रावण ने उन सब मंत्रियों को संबोधित करते हुए सारी सभा को गुंजा दिया और किसी पर दोष न लगाते हुए कहा - ॥3 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  6.35.3-4h 
अथ तान् सचिवांस्तत्र सर्वानाभाष्य रावण:।
सभां संनादयन् सर्वामित्युवाच महाबल:॥ ३॥
जगत्संतापन: क्रूरोऽगर्हयन् राक्षसेश्वर:।
 
 
अनुवाद
जगत् को पीड़ा देने वाले महाबली और क्रूर राक्षसराज रावण ने उन सब मंत्रियों को संबोधित करते हुए सारी सभा को गुंजा दिया और किसी पर दोष न लगाते हुए कहा - ॥3 1/2॥
 
Addressing all those ministers, the mighty and cruel demon king Ravana, who causes torment to the world, echoed the entire assembly and without blaming anyone, said - ॥ 3 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)