श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.35.23 
देवदानवयक्षेभ्यो गृहीतश्च वरस्त्वया।
मनुष्या वानरा ऋक्षा गोलाङ्गूला महाबला:।
बलवन्त इहागम्य गर्जन्ति दृढविक्रमा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘आपको अविनाशी होने का वरदान केवल देवता, दानव और यक्षों से ही प्राप्त हुआ है, मनुष्य आदि से नहीं। परंतु यहाँ तो मनुष्य, वानर, भालू और वानर आकर गर्जना कर रहे हैं। ये सभी बड़े बलवान, सैन्यबल से युक्त, बलवान एवं पराक्रमी हैं॥ 23॥
 
‘You have received the boon of being indestructible only from the Gods, Demons and Yakshas, ​​not from humans etc. But here humans, monkeys, bears and apes have come and are roaring. All of them are very strong, full of military power and strong and valiant.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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