श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.35.14 
धर्मो वै ग्रसतेऽधर्मं यदा कृतमभूद् युगम्।
अधर्मो ग्रसते धर्मं यदा तिष्य: प्रवर्तते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब सत्ययुग आता है, तब धर्म प्रबल होकर अधर्म को ग्रस लेता है। और जब कलियुग आता है, तब अधर्म ही धर्म को दबा देता है। ॥14॥
 
When the Satya Yuga (The Golden Age) comes, Dharma becomes stronger and engulfs Adharma. And when the Kali Yuga comes, Adharma itself suppresses Dharma. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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