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श्लोक 6.34.3  |
उत्सहेयमहं गत्वा त्वद्वाक्यमसितेक्षणे।
निवेद्य कुशलं रामे प्रतिच्छन्ना निवर्तितुम्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे काली आँखों वाले मित्र! मुझमें इतना साहस और उत्साह है कि मैं श्री राम के पास जाकर उन्हें आपका संदेश और कुशलक्षेम बताऊँ और फिर वहाँ से छिपकर लौट आऊँ॥3॥ |
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| O friend of the black eyes! I have the courage and enthusiasm to go to Shri Ram and convey your message and well-being to him and then return from there hidden.॥ 3॥ |
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