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ramayan 6.34.17: तब सीता ने बड़े स्नेह से लौटी हुई प्रियतम सरमा को गले लगाया और बैठने के लिए आसन देकर कहा -॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.34.17 
तां तु सीता पुन: प्राप्तां सरमां प्रियभाषिणीम्।
परिष्वज्य च सुस्निग्धं ददौ च स्वयमासनम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब सीता ने बड़े स्नेह से लौटी हुई प्रियतम सरमा को गले लगाया और बैठने के लिए आसन देकर कहा -॥17॥
 
Then Sita embraced the beloved Sarma who had returned with great affection and offered her a seat to sit and said -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)